Ganesh Bhajan Lyrics गणेश भजन लिरिक्स

Ganesh Bhajan Lyrics - गणेश जी के भजन लिखे हुए, गणेश चतुर्थी, करवाचौथ, और धार्मिक उत्सव के समय गए जाने गणेश भजन।

Ganesh Bhajan Lyrics

गौरा लल्ला को मनाओ तो जाने

गौरा लल्ला को मनाओ तो जाने

घर इनको बुलाओ तो जाने


बुद्धि के दाता हैं ये तो प्रभु

देते हैं बुद्धि और ज्ञान


इनको जो पूजे और इनको भजे

मिलता है जग में उसे मान


इसको मनाया तो क्या किया

उसको मनाया तो क्या किया


गौरा लल्ला को मनाओं तो जाने

घर इनको बुलाओ तो जाने


हैं देवताओँ में सबसे बड़े

सेवा में इनकी सभी हैं खड़े


हैं देवताओँ में सबसे बड़े

सेवा में इनकी सभी हैं खड़े


सब इनको प्रथम पूजक माने

गौरा लल्ला को मनाओं तो जाने


घर इनको बुलाओ तो जाने.

कुछ और इनको है भाता नहीं


लड्डू और मोदक हैं भाते इन्हें

माता मनाये तो माने नहीं


खुश हों जो मोदक खिलाये इन्हें

मेवा खिलाओ तो माने नहीं


मिश्री खिलाओ तो माने नहीं

भोग लड्डू का लगाओ तो माने


गौरा लल्ला को मनाओं तो जाने

घर इनको बुलाओ तो जाने


है विघ्नहर्ता विनायक भी ये

कष्टों में होते सहायक भी ये


पूजो अगर सच्चे मन से इन्हें

हैं लाभ और शुभ के दायक भी ये


हैं रिद्धि सिद्धि के दाता यही

हैं धन और दौलत के दाता यही


इनकी भक्ति को पाओ तो जाने

गौरा लल्ला को मनाओं तो जाने

घर इनको बुलाओ तो जाने


गजानन पूरे कर दो काज


गजानन पूरे कर दो काज

शरण में आये हम भी आज

शिव गौरा के राज दुलारे

देवों के सरताज


सबसे पहले शिव भोले

ने करि तुम्हारी पूजा

हम भी पहले तुम्हे मनाएं

काम करें फाई दूजा


लड्डुओं का तुम्हे भोग लगाएं

आजाओ महाराज

गजानन पूरे कर दो काज


मूसे की तुम करो सवारी

शोभा जग में न्यारी

एक दन्त गज बदन


तुम्हारा जाऊं मैं बलिहारी

तीन लोक में राज

तुम्हारा धरती या आकाश

गजानन पूरे कर दो काज


सात सुरों से आज

सजाई हमने तेरी माला

हमको चरणों में रख लेना

सुनलो गौरी लाला


तेरी किरपा से राणा

की गूंजे ये आवाज़

गजानन पूरे कर दो काज


ओ गौरी सूत गणराजा


तुम जो कृपा करो तो

मिट जाये विपदा सारी

ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी


तुम हो दया के सागर

क्या बात है तुम्हारी

ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी


विघ्नौ को हरने वाले

सुख शांति देने वाले

मोह पाश काटते हो

तुम भक्ति देने वाले


तुमने रचाई श्रष्टि

तुम ने ही है सवारा

ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी


ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी

तुम पहले पूजे जाते

फ़िर काम बनते जाते


आये शरण तिहारी

मन चाहा फल है पाते

मुझको गले लगा ले

आया शरण तिहारी

ओ गौरी सूत गणराजा


गणनायक गजमुख धारी

ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी

लम्बे उदर में तुमने


संसार है छिपाया

सतगुण से है भरी हुई

गणराज तेरी काया

दुर्गुण पे सतगुणो सी


ये मुस की सवारी

ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी

ओ गौरी सूत गणराजा


गणनायक गजमुख धारी

तुम जो कृपा करो तो

मिट जाये विपदा सारी

ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी


तुम हो दया के सागर

क्या बात है तुम्हारी

ओ गौरी सूत गणराजा

गणनायक गजमुख धारी


हे गौरी नंदन तुझको वंदन


हे गौरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला

गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला ॥


सिध्दि सदन गज वदन विनायक

कृपा सिंधु सुंदर सब लायक

ब्रम्हा विष्णु जपते निशदिन

ब्रम्हा विष्णु जपते निशदिन


तेरे नाम की माला

हे गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला

गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला ॥


मोदक प्रिय मुद मंगल दाता

विद्या वारिधि बुद्धि विधाता

कृपा करहु अब अंतर्यामी

कृपा करहु अब अंतर्यामी


गोरी सुत गणराजा

हे गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला

गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला ॥


चंदा ने तेरा रूप बनाया

तारों ने गहना पहनाया

सब ऋषियों ने नमन किया तुझे

सब ऋषियों ने नमन किया तुझे


भक्तों के प्रतिपाला

हे गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला

गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला ॥


हे गौरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला

गोरी नंदन तुझको वंदन

तेरा रूप निराला ॥


रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति


रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति

आपकी मेहरबानी हमें चाहिये

पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका


लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये

रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।


रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति

आपकी मेहरबानी हमें चाहिये

पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका


लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये

रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।।


सर झुकाता हूँ चरणों मे सुन लीजिये

आज बिगड़ी हमारी बना लीजिये

ना तमन्ना है धन की ना सर ताज की


तेरे चरणों की सेवा हमें चाहिये

रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।।


तेरी भक्ति का दील मे नशा चूर हो

बस आँखो मे बाबा तेरा नूर हो

कण्ठ पे शारदा माँ हमेशा रहे


रिध्धि सिद्धि का वर ही हमें चाहिये

रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति।।


सारे देवों मे गुणवान दाता हो तुम

सारे वेदों मे ज्ञानो के ज्ञाता हो तुम


ज्ञान देदो भजन गीत गाते रहे

बस यही ज़िन्दगानी हमें चाहिये

रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति।।


रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति

आपकी मेहरबानी हमें चाहिये

पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका


लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये

रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो


घर में पधारो गजाननजी


घर में पधारो गजाननजी

मेरे घर में पधारो

रिद्धि सिद्धि लेके आओ गणराजा

मेरे घर में पधारो ।


राम जी आना

लक्ष्मण जी आना

संग में लाना सीता मैया

मेरे घर में पधारो ॥


ब्रम्हा जी आना

विष्णु जी आना

भोले शशंकर जी को ले आना

मेरे घर में पधारो ॥


लक्ष्मी जी आना

गौरी जी आना

सरस्वती मैया को ले आना

मेरे घर में पधारो ॥


विघन को हारना

मंगल करना

कारज शुभ कर जाना

मेरे घर में पधारो ॥

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