Guru Poornima गुरु पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है

 जब ईश्वर ने इस सृष्टि की रचना की तब से इसमें गुण अवगुण ,ज्ञान अज्ञान दोनों साथ साथ फलते रहे , प्रकृति की महान सरचना मानव ने जब अपनी अज्ञानता को दूर करने के लिए पर्यटन किया तो उसे मार्ग में गुरु मिल गए . गुरु ने उसे सही गलत , अच्छा बुरा का बोध कराया और विवेकता पूर्ण कार्य करने की शक्ति दी


गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाये ॥



कबीर जी कहते है गुरु और ईश्वर दोनों खड़े है मैं पहले किसके चरणों में शीश झुकाऊं ,कबीर जी आगे कहते है , मैं पहले अपने गुरु के चरणों में शीश झुकता हूँ जिन्होंने मुझे ईश्वर से मिला दिया



संस्कृत के श्लोक में गुरु को परम ब्रह्म बताया गया है -



गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥



गुरु ही ब्रह्मा है गुरु ही विष्णु है गुरु ही शिव है ,
गुरु ही साक्षात परमब्रह्म है ऐसे गुरु को मेरा नमन है



अर्थात जो गुरु अपने शिष्य को ईश्वर (परमब्रह्म )का साक्षात्कार करवा दे वही गुरु ब्रह्मा है वही गुरु विष्णु है वही गुरु शिव है , ऐसे गुरु को मेरा नमन है नमन है नमन है .



अखंड मण्डलाकारम व्यापात्म येन चराचरम
ततपदम दर्शितं येन तस्मे श्री गुरुवे नमः



वह परमात्मा जो पुरे ब्राह्माण में अखंड रूप से विद्यमान है , जो चर और अचर अर्थात जो ईश्वर स्थिर और अस्थिर सबमे समाया हुआ है , उस ईश्वर के जो तत्व रूप से दर्शन करवा दे ऐसे गुरु को मेरा नमन है

Aashad maas ki purnima



आषाढ़ मॉस की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है ,इस दिन अपने प्यारे गुरु को सम्मान देने के लिए शिष्य हर प्रकार से कोशिश करता है ताकि उसका गुरु उस पर प्रस्सन हो जाये और उसे अँधेरे से प्रकाश की और ले जाये . गुरु दो शब्दों के मेल से बना है गु और रु गु का अर्थ है अँधेरा और रु का अर्थ है प्रकाश जो आपको अँधेरे से प्रकाश की और ले जाये वही गुरु है .

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते



इस दिन वेद व्यास जी का जनम दिवस भी है जिन्होंने वेदो की रचना की ,इसी लिए उन्हें वेद व्यास भी कहते है ,उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा का दिवस मनाया जाने लगा इसी लिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते है,महर्षि वेद व्यास जी ने 18 पुराणों की रचना भी की थी

कैसे करें गुरु पूजा



जब हर एक धरम , हर एक ग्रथ में गुरु को ईश्वर से ऊँचा बताया गया है तो गुरु की पूजा करना हर एक शिष्य का कर्तव्य बन जाता है . कैसे करे गुरु पूजा , ये दिन हर उस शिष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण जो ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु के सानिध्य में जाकर अपना शीश झुकता है .सुबह ४ बजे उठ कर स्नान आदि से पवित्र होकर ,गुरु मन्त्र का जाप और ध्यान करने काम से काम २ घंटे तक गुरु का ध्यान करने के बाद गुरु के चरणों में शीश झुकाते हुए अपने अपराधों की क्षमा याचना करने. और उसके बाद अपने गुरु की आरती करें और पूरा दिन गुरु चर्चा में अपना समय व्यतीत करें.
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