जिसके सपने हमें Jiske Sapne Hame Roz Aate Hain

जिसके सपने हमें रोज़ आते है गाने को लता मंगेशकर ने गया और इसके बोल हसरत जयपुरी ने लिखे हैं। इस गीत को संगीत आनंदजी वीरजी शाह ने दिया है।

Jiske Sapne Hame Roz Aate Hain

Jiske Sapne Hame Roz Aate Hain Lyrics

जिसके सपने हमें
रोज़ आते है दिल लुभाते रहे
ये बता दो बता दो
ये बतादो तुम कहीं
वो ही तो नहीं वही तो नहीं

जिसके सपने हमें
रोज़ आते है दिल लुभाते रहे
ये बतादो तुम कहीं
वो ही तो नहीं वही तो नहीं

जब भी झरनो से मैंने सुनी रागिनी
जब भी झरनो से मैंने सुनी रागिनी
मैं ये समझा तुम्हारी ही पायल बजी

हो जिसकी पायल पे
हो जिसकी पायल पे हम
दिल लुटाते रहे जान लुटा ते रहे

ये बतादो तुम कहीं
वो ही तो नहीं वही तो नहीं
जिसके रोज़ रोज़ हम गीत

गेट रहे गुनगुनाते रहे
ये बतादो तुम कहीं
वो ही तो नहीं वही तो नहीं

जब भी ठंडी हवा गन गुणाती चलि
जब भी ठंडी हवा गन गुणाती चलि
मैं ये समाजी तुम्हारी मुरलि बजी

जिस की मुरलि पे जिस की मुरलि पे
हम लहराते रहे बिलखते रहे
ये बतादो तुम कहीं
वो ही तो नहीं वही तो नहीं

जिसके सपने हमें
रोज़ आते है दिल लुभाते रहे
ये बतादो तुम कहीं
वो ही तो नहीं वही तो नहीं

ये महकते बहकते हुए
राश्ते खुल गए आप ही
प्यार के वास्ते दे रही है पता

माध भरी वादियां
जैसे पहले भी हम
तुम मिले हो यहाँ

हो कितने जन्मों से जिसको
बुलाते रहे आजमाते रहे
ये बतादो तुम कहीं
वो ही तो नहीं वही तो नहीं

जिसके सपने हमें
रोज़ आते है दिल लुभाते रहे
ये बतादो तुम कही
वो ही तो नहीं वही तो नहीं

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